भूतों से बात होती है मेरी। भूतों ने साफ मना कर दिया कि इस भरी ठंड में हम लोग श्मशान घाट से बाहर नहीं निकल सकते। एक भूत ने दूसरे भूत से कहा और चौथे भूत को गरमा-गरम जलती हुई लाश के पास बिठा दिया। पीपल के पेड़ पर नाइट ड्यूटी देने वाले भूत ने तो साफ मना कर दिया कि इत्ती कड़कड़ाती ठंड में कोई डरे या न डरे, अपन तो यहीं घर में रहने वाले हैं। इधर पुराने खंडहर पर एक बड़ी सी पाइप के सहारे ऊपर चढ़कर डराने वाले पुराने खूंखार भूत ने भी अपने हाथ खड़े कर लिए। जब ठंड का मौसम हो और मावठ (सर्दियों में होने वाली बरसात) भी हो रही हो, तो ऐसी झिम-झिमाती बरसात और ठंड-ठंडाती ठंडाई में कौन बेवकूफ भूत होगा जो डराने जैसे पागलपंती वाले कामों में सड़कों पर दौड़ेगा? 
इधर ठंड का मौसम शुरू होते ही भूतनियां गरमा-गरम स्वेटर और कोट निकालकर भूतों को हिदायत देना शुरू कर देती है। नव-भूतों के सामने ताजा भूतनियां अपना ताजा वक्तव्य दे रही है- कोई डरे तो डरे! ना डरे तो ना डरे! सब डराने का सरकारी ठेका केवल तुम्हारा ही नहीं है! भरी ठंड में पीपल की डाल पे कूदना-फांदना ठीक नहीं है। मावठ वाली अमावस रात में, खंडहर में सर्दी वाली बरसात में, यूं भीग कर कब तक खी-खी-खी करोगे? अगर ठंड बैठ गई है और बाय द वे कोरोना का पोता ऑमिक्रोन आ गया तो! फिर घूमते फिरना हॉस्पिटलों में! इनकी हालतें तो तुम जानते ही हो! सारे के सारे राक्षस बैठे हैं। भूतों की आत्मा भी निकाल कर जाने कब हवा कर देंगे, ये हॉस्पिटल वाले! इसका किसी को पता नहीं लगेगा। मेरा सिर्फ यही कहना है। इस भरी ठंड में सिर्फ यहीं अपने घर श्मशान में ही रहना है। इधर बहुत ताजा-ताजा मुर्दे आ रहे हैं। ऐसे लोग जो खा पीकर पलंग पर पड़ जाते हैं। कसरत-वसरत कुछ नहीं करते हैं। वे हार्ट अटैक के शिकार बनकर सीधे ही श्मशान पहुंच रहे हैं। ऐसे आराम परस्त अमीर मुर्दों को खाना बड़ा मजेदार होता है। इनकी आग के सामने मूंगफली खाना बड़ा टेस्टी होता है। इसलिए डराने के सरकारी काम में उलझना बिल्कुल बेकार है। भूतनियां हिदायतें दे रही है अपने-अपने पति लोगों को! 
भूत लोग भी अजीब किस्म के हैं जीव होते हैं! साल भर इधर गर्ल्स हॉस्टल को घूरते हैं। डराने की बजाए इश्क फरमाते रहते हैं। जब देखो तब फेसबुक व्हाट्सएप में घुसे पड़े रहते हैं। जब डराने का सरकारी कोटा पूरा नहीं होता है तो अंत दिसंबर में धमा-धम डराने लगते हैं। ठंड से बचने के लिए भूत गरमा-गरम मुर्दे से आग तपा रहे थे। तब एक भूत ने कहना शुरू किया- सुनो भूत लोगों! हम भूतों की गति एंड शक्ति अपार होती है। हमें भूत, प्रेत, राक्षस, पिशाच, यम, शाकिनी, डाकिनी, चुड़ैल, गंधर्व आदि कहा जाता है। हम अदृश्य और बलवान होते हैं। हम भूत या प्रेत योनि में न जाकर पुन: गर्भधारण कर मानव भी बन जाते हैं। फिर हम चुनाव लड़ते हैं और संसद में जाकर हंगामा मचाते हैं। कानून तोड़ते हुए कानून बनाते हैं। हम अदृश्य होते हैं। हमारे शरीर धुंधलके तथा वायु से बने होते हैं अर्थात् हम भूत शरीर-विहीन होते हैं। समझे! ऐसा समझाते हुए उस वरिष्ठ भूत ने दल-दल पार्टी से टिकट मिल जाने का निर्णय सुनाया। भरी ठंड में श्मशान घाट में होने वाले चुनाव में उसे विजेता बनाने के लिए खतरे वाली हड्डियों के चुनाव चिन्ह का निशान दिखाया। दल-दल पार्टी के भूत ने वोट के लिए धमकाया!

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