करोना के नये वेरिएंट ओमीक्रोन ने ब्रिटेन में दहशत का तांडव मचा के रखा है। लंदन की खबरों के अनुसार ब्रिटेन में रोजाना 80 हजार से ज्यादा लोग ओमिक्रोन के संक्रमित मरीज पाए जा रहे हैं, वहां से कई उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। वहां बूस्टर डोज पर गहन विचार-विमर्श कर 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को तीसरा और चौथा वैक्सीन  डोज़  लगाने के लिए तैयारियां की जा रही है। उल्लेखनीय है कि वहां 95 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन का दोनों डोज लग चुका है, उसके बाद भी करोना नियंत्रण से बाहर है।
ब्रिटेन अब ओमीक्रोन का नया हॉटस्पॉट बन गया है। ताजा खबरों के हिसाब से वहां लाखों लोग संक्रमित पाए गए हैं इसमें बहुत अधिक लोग ओमीक्रोन से भी संक्रमित हैं, लंदन में सभी उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इजराइल में भी सतर्कता बरतते हुए वहां के निवासियों को तीसरा,चौथा बूस्टर डोज लगाना शुरू कर दिया है। इस संक्रमण में पूरे यूरोप में भी तहलका मचा दिया है। अब लगभग 80 से100 देशों में ओमिक्रोन फैल चुका है। अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ संगठन ने रेड अलर्ट जारी कर सभी देशों को चेतावनी देकर कहा है कि विश्व को एकजुट होकर इसका सामना करना होगा अन्यथा फिर भयावह स्थिति बनने की संभावना है। अमेरिका में भी इसके वैरीअंट पाए गए हैं
भारत के कर्नाटक में इस वैरीअंट के 40 मरीज पाए गए, बात चिंताजनक तो है ही,जरूरत केवल अतिरिक्त सावधानी की ही है। भारत में भी ओमी क्रोन वैरीअंट के 300 मरीज पाए गए हैं ये अच्छी बात है कि सभी कोई जनहानि नहीं हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में उच्च स्तरीय अधिकारियों तथा संदर्भित मंत्री के साथ दिल्ली में 3 घंटे की आपात बैठक में इस महामारी के संदर्भ में बैठक ली है एवं सभी को आवश्यक निर्देश भी दिए हैं। विश्व स्वास्थ संगठन ने आवश्यक बैठक लेकर पूरे विश्व को इस बात के लिए चेताया है की जरा सी सावधानी घटने पर यह वायरस तेजी से फैलने की स्थिति में आ जाता है,ऐसे में कोविड-19 के संक्रमण के समय दिए गए आवश्यक निर्देशों का कड़ाई से पालन करने की आवश्यकता है खासकर विकासशील देशों में जहां पर पूरी जनसंख्या को वैक्सीन नहीं लग पाई है। भारतीय जनमानस को इसमें ज्यादा पैनिक होने की जरूरत नहीं है क्योंकि वैक्सीन इसकी रोकथाम के लिए अभी भी सक्षम है, केवल अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता है। लंदन स्थित इंपीरियल कॉलेज के वायरस एक्सपर्ट टॉम पीकॉक ने दक्षिण अफ्रीका के बोत्सवाना में नए खतरनाक वैरीअंट की जानकारी दी है। उन्होंने ट्विटर अकाउंट के हवाले से कहा है कि यह नया वैरीअंट डेल्टा स्ट्रेन सहित अन्य किसी भी वैरिएंट के मुकाबले बहुत ज्यादा खतरनाक क्षमता वाला है। उसके बाद से दुनिया भर के वैज्ञानिकों की नजर इस बोत्सवाना वेरिएंट पर लगी हुई है। नया वेरिएंट दक्षिण अफ्रीका के बोत्सवाना से निकला है, इसीलिए इसे बोत्सवाना वैरीअंट का बोलचाल की भाषा में नाम रखा गया है। यह नया वैरीअंट 1.1 पॉइंट 529 है, यह दक्षिण अफ्रीका से सामने आया है। दक्षिण अफ्रीका के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्युनिकेशन डिसीस ने पुष्टि की कि दक्षिण अफ्रीका में इस वेरिएंट का पता चला है और इसके लगभग 400 मरीज पाए गए हैं। इसके अलावा लंदन स्थित जेनेटिक इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर डॉ फेल्क बेलौस का मानना है कि यह नया वेरिएंट किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज से पैदा हुआ है। हो सकता है मरीज एचआईवी वायरस से पीड़ित रहा हो। इस नए वेरिएंट के सबसे ज्यादा मरीज दक्षिणा अफ्रीका में लगभग 400 से ज्यादा मरीज मिले हैं इसके अलावा बोत्सवाना में करीब 10, हांगकांग में 5 और इजरायल में 20 मरीज मिले हैं।
इस वेरिएंट्स में तहलका मचाने की आशंका इसलिए भी है क्योंकि इसके बहुत तेजी से फैलने की आशंका जताई जा रही है। यह डेल्टा वेरियन से लगभग 70 गुना तेजी से फैलता है। दुनिया भर के वैज्ञानिक इस वैरीअंट को बड़ा खतरा मानते हैं, उन सब का मानना है कि यह नया वैरीअंट तेजी से संक्रमण फैलाने वाला है और यह पूर्व के डेल्टा वेरिएंट से कई गुना खतरनाक माना जा रहा है। बताया जाता है कि 1.1,529 वैरीअंट के 50 से ज्यादा म्युटेंट मिल चुके हैं। जिसमें 32 न्यूटन इसके स्पाइक प्रोटीन में ही है। यह वैरीअंट शरीर की सेल में प्रवेश करने के लिए स्पाइक प्रोटीन का सहारा लेता है। यह वायरस शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को धोखा देते हुए मरीजों की मौत का कारण बन जाता है। सबसे उल्लेखनीय और महत्वपूर्ण बात यह है कि दुनिया भर में विकसित ज्यादातर कोविड-19 का अटैक स्पाइक प्रोटीन पर ही होता है क्योंकि यह नया वैरीअंट स्पाइक प्रोटीन का है। यह वैक्सीन को भी बेअसर करने में सक्षम है। इस वैरीअंट से अमित दो हांगकांग के मरीज फ़ाइजर इंजेक्शन के दो डोज ले चुके थे, फिर भी उन्हें संक्रमण हुआ और यही कारण है कि वैज्ञानिक इसे पर्याप्त सबूत मान रहे हैं कि नया वैरीअंट ज्यादा खतरनाक है एवं इलाज के अवसर अवसर को भी खत्म कर देता है। हांगकांग में दोनों मरीजो को अलग-अलग कमरे में रखा गया था और उनकी जांच में बहुत ज्यादा वैरीअंट की मात्रा पाई गई थी। डॉक्टरों के अनुसार नए वेरिएंट का हवा में फैलने का खतरा है। यही कारण है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस खतरे को भांपते हुए इस पर नियंत्रण करने के लिए आपातकाल बैठक बुलाई है। अफ्रीका देशों में फ्लाइट रोकने का सिलसिला शुरू हो गया इसराइल ने सात अफ्रीकी देशों से आने-जाने पर पाबंदी लगा दी है। इजराइल सरकार ने दक्षिण अफ्रीका बोत्सवाना, जिंबाब्वे, मोजांबिक, नामीबिया जैसे देश को रेड लिस्ट में डाल दिया है। ब्रिटन ने अफ्रीकी देशों से आवाजाही पर रोक लगा दी है ।वहां की सरकार ने इन देशों की सभी फ्लाइट पर रोक लगा दी गई है। भारतीय संदर्भ में राज्यों को निर्देश दिया है कि सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की सघन जांच की जाए खासकर दक्षिण अफ्रीका,हांगकांग, बोत्सवाना से सीधे आने वाले या इधर से गुजरने वाली फ्लाइट के यात्रियों पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश भी दिए हैं। भारत सरकार ने अपने पत्र में कहा है कि इन देशों से आने वाले यात्रियों पर कड़ी नजर रखी जाए एवं यह कहां जाते आते हैं, इस पर भी निगरानी रखी जाए। अमेरिका में भी नए वैरीअंट के कलनेक्शन दिखाई दिए हैं। चिंताजनक बात यह है कि यह नया वेरिएंट कोविड-19 वैक्सीन लगाने वालों पर भी बेअसर हो जाता है। अमेरिका, ब्रिटेन, इजरायल, ब्राजील, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस यह सब अमीर देश अपने 90% नागरिकों को वैक्सीन का डोज लगा चुके हैं। दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से निकले इस वैरीअंट से सभी देश खासा परेशान है। भारत के संदर्भ में भी बहुत ही चिंताजनक बात होगी क्योंकि भारत विश्व का दूसरे नंबर पर जनसंख्या वाला देश है और यदि यह वैरीअंट भारत में प्रवेश कर जाता है तो यह भारत में बहुत तेजी से फैलने की संभावना जताई जा रही है। भारत में पूरी जनसंख्या को अभी वैक्सीन नहीं लग पाई है, ऐसे में बूस्टर डोज देने की बात करना हवा में बात करने के जैसी वाली बात होगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा ब्रिटेन अमेरिका, ब्राज़ील, इजराइल के वैज्ञानिक इस नए वेरिएंट से बहुत ज्यादा चिंतित एवं चौकन्ना हो गए हैं। भारत में कोरोनावायरस के प्रकोप से थोड़ी राहत मिलने पर जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है, लेकिन एक बार फिर बड़े खतरे की आहट सुनाई देने लगी है। कोविड-19 संक्रमण को पहले लगभग 2 साल होने जा रहे हैं और इसके बाद भी इसके फैलाव पर पर रोक नहीं लग पाना दुनिया भर के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। बोत्सवाना वैरीएंटट के प्रति वैज्ञानिक काफी आशंकित हैं। नए वेरिएंट के बारे में आशंका जताई जा रही है कि यह महामारी की तीसरी लहर ना कहीं ले आए, जो वैश्विक स्थिति के लिए बहुत खतरनाक होगी। भारत वासियों को इस संदर्भ में विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।

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