सत्संग को आदत बना लो और उसमें शामिल वचनों को अपने जीवन में ढाल लो तो आपको सारे कष्टों से मुक्ति मिल सकती है। सत्संग सत्य का संग है और सत्य सदैव अटल रहता है। जो सत्य का संग करता है उसे हमेशा लाभ ही लाभ मिलता है। हुजूर महाराज जी ने चेतावनी देते हुए कहा कि कोरोना का संकट फिर से दस्तक दे रहा है लेकिन हमें घबराए बिना इसका मुस्तैदी से सामना करना पड़ेगा। लापरवाही किये बिना यदि हम कड़ाई से नियमो की पालना करेंगे तो सतगुरु की दया से कोई नुकसान नहीं होगा। मास्क लगाना और समय-समय पर हाथ धोना आपकी दिनचर्या का हिस्सा हो। जिंदगी रहेगी तो ही बाकी काम रहेंगे। गुरु महाराज जी ने कहा कि जहां तक सत्संग की बात है पूर्व की भांति सत्संग वर्चुअल रूप से जारी रहेंगे और संगत को सम्बल प्रदान करते रहेंगे। हुजूर कँवर साहेब जी ने कहा कि अपने मूल धर्म को कभी ना छोड़ना। आपके मन में जब तक “दया, प्यार, प्रेम” रहेंगे तब तक आप शाहों के शाह हैं क्योंकि इन गुणों के कारण आप भक्ति को धारण करते हैं।गुरु महाराज जी ने कहा कि एक भिक्षुक किसी घर में भिक्षा लेने गया। उस घर की गृहिणी अपने पति को खाना खिला रही है। भिक्षुक को कहती है कि आप थोड़ी देर रुकें। पति को खाना खिला कर और उसके हाथ धुला कर वह भिक्षुक को भिक्षा दे देती है। भिक्षुक सोचता है कि मेरे से ये जमींदार कितना अच्छा है, कितने मजे में है। उधर वो जमींदार अपने घर से किसी सेठ के पास बीज के पैसे लेने जाता है। जमींदार सेठ के ठाट देख कर सोचता है कि जीना तो इसका है। ये कितने मौज में रहता है। इतनी देर में सेठ के पास सन्देशा आता है कि गोदाम में आग लग गई सारा माल जल गया। सेठ माथा पकड़ कर बैठ गया। इतनी देर में एक फकीर वहां से मस्ती में जा रहा था। उस फकीर को देख कर सेठ बोला कि मेरा जीवन भी कुछ जीवन है। जीवन तो उस फकीर का है। गुरु महाराज जी ने कहा कि हमारा यही हाल है। हम ये सोचते हैं कि सांसारिक भोग पदार्थो का संचय ही जीवन का सुख है। जिसके पास जितना है उतने से कोई खुश नहीं है सब और ज्यादा की होड़ में लगे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रसंग की भांति अगर कोई वास्तव में सुखी है तो वो फकीर है। सुखी वो है जिसने अपने आप को जीत लिया है क्योंकि जो अपने आप को जीत लेता है वही परमात्मा को पाता है। हुजूर महाराज जी ने कहा कि जीवन को दो नियमो में बांध लो। यदि आपसे भूल हो जाये तो माफी मांग लो और यदि कोई भूल कर दे तो उसे माफ कर दो। गृहस्थ में रहते हुए मां बाप की सेवा, मानवता की सेवा करोगे तो सच्चा सुख हासिल कर लोगे। “निंदा, चुगली, धोखा, कपट” से कुछ प्राप्त नहीं कर सकते। क्षणभंगुर सुखों में गाफिल ना होकर उस सुख को हासिल करो जो सदा रहेगा। गुरु महाराज जी ने कहा कि महापुरषो का संदेश सब के लिए कल्याणकारी होता है। उन्होंने कहा कि जैसे “सरवर, तरुवर और बादल परमार्थ” के कार्य में ही लगे रहते हैं वैसे ही सन्त महात्मा भी परोपकार और परमार्थ का भाव लेकर ही देह धारण करते हैं। उन्होंने कहा कि जब भी आप स्वार्थ रहित जनकल्याण का कार्य करना चाहोगे तब तब आपको इस जगत का बैर झेलना पड़ेगा क्योंकि जगत और भगत का बैर इस जगत में प्रसिद्ध है। उन्होंने कहा कि इन कष्टों की परवाह ना करते हुए अपने धर्म पर टिके रहो।

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